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United We Uttarakhandi's  United Uttarakhand is a brainchild of curiosity to explore the culture traditions & nature of our motherland- उत्तराखंड 💕 One for all,All for one🙏

गाँव के उन घरों की सबसे खास बात होती है उनके यह खूबसूरत दरवाज़े।इन दरवाजों में की गई यह कलाकारी पूरे घर की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती है।आज की तारीख में ढूंढते नहीं मिलेंगे इतनी बारीकी से कलाकारी करने वाले कलाकार।
आपमें में से भी कितनों के घर में होंगे ऐसे आकर्षक मुख्य द्वार।
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Picture Credits: @himalayanson
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Chakrata is a cantonment town located at an elevation of approximately 7500 feet in Garhwal Himalayas. It is a part of Lesser Himalayas. The area is located between the river valley of Yamuna and Ton. Chakrata is a permanent headquarter of secret Special Frontier Force (SFF) or Establishment 22. SFF is the only the only ethnic Tibetan unit of the Indian Army and that was established after Indo China war. 
Chakrata is around 98 kilometers away from the capital city Dehradun of Uttarakhand.It is one of the unexplored destinations for travellers. The town was known earlier as Jaunsar bawar, a small hamlet of Jaunsari tribe.
The eastern side of the region is occupied by the magnificent hilly town of Mussoorie while the west is occupied by Kaleidoscopic Kinnaur.Chakrata is renowned for freezing temperatures during winters and pleasant climate during summers.
◾Chakrata includes many tourist attractions.Away from the hustle bustle of Dehradun, Tiger Falls is a magnificent waterfall located amidst hilly terrain near Chakrata. At an elevation of 312 ft, it is considered the highest direct waterfall in India.
▪Also known as Devban, Gods Own Forest in the hilly terrains of Chakrata is located 13kms from Chakrata. ▪Chilmiri Neck is the highest peak in Chakrata surrounded by lush green deodar forests. ▪Budher caves are located at 3 km trek from FRH Budher till Miola tibba. These caves are also known by the name of Miola caves as a German national, Miola discovered these caves. ▪Kanasar is surrounded by one of the best-rated Deodar forest of Asia. About 25 km from Chakrata market on Tuini Road.

Travelling in the monsoon can be tricky as the area sees frequent road blockages due to landslides.
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हम जी रहे हैं उस ज़माने में जहाँ अपने ही घर जाना एक सपना से हो गया है!
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Picture Credits: Akash Singh Latwal
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नीम करोली बाबा का कैंची धाम आश्रम नैनीताल से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल-अलमोड़ा रोड़ पर समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। क्षिप्रा नाम की छोटी पहाड़ी नदी के किनारे सन् 1962 में कैंचीधाम की स्थापना हुई।24 मई 1962 को बाबा ने पावन चरण उस भूमि पर रखे, जहां वर्तमान में कैंची मंदिर स्थित है। 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यहां दो घुमावदार मोड़ है जो कि कैंची के आकार के हैं इसलिए इसे कैंचीधाम आश्रम कहते हैं। नीम करौली बाबा को इस आश्रम में आने के बाद ही अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमरीकी भक्त बाबा राम दास ने एक किताब लिखी जिसमें नीम करौली बाबा का उल्लेख किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों से लोग उनके दर्शन तथा आशीर्वाद लेने के लिए आने लगे।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीम करौली में कठिन तप करके स्वयं ही नीम करौली बन गए। उनकी अलौकिक शक्तियां पूरे देश में, यहां तक की विश्व में इतनी अधिक चर्चा में आई कि उनका नाम किसी से अनजान नहीं रहा।
हमेशा एक कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा के आर्शीवाद के लिए भारतीयों के साथ-साथ बड़ी-बड़ी विदेशी हस्तियां भी उनके आश्रम पर आती हैं।10 सितम्बर 1973 में वृन्दावन की पावन भूमि पर नीम करौली बाबा का निधन हो गया लेकिन कैंची धाम आश्रम में अब भी विदेशी आते रहते हैं। बताया जाता है कि सबसे ज्यादा अमेरिकी ही इस आश्रम में आते हैं। आश्रम पहाड़ी इलाके में देवदार के पेड़ों के बीच है। यहां पांच देवी-देवताओं के मन्दिर हैं। इनमें हनुमान जी का भी एक मन्दिर है। भक्तों का मानना है कि बाबा खुद हनुमान जी के अवतार थे।
फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब की प्रेरणा का स्थल कैंची धाम ही है। यहां नीम करौली बाबा का कैंची धाम आश्रम इनके अलावा कई सफल लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत साबित हुआ। .
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🙏अगनेरी मैया मंदिर - चौखुटिया🙏
चौखुटिया के गेवाड़ घाटी की ऐतिहासिक रंगीली धरती में बसा प्रसिद्ध अगनेरी मैया मंदिर प्राचीन काल से ही अटूट आस्था का केंद्र रहा है। रामगंगा नदी के पावन तट पर स्थित होने के कारण यहां पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्घालु आते हैं। अपने पौराणिक स्वरूप को लिए यह मंदिरआकर्षण का केन्द्र है।
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मान्यता है कि अगनेरी मैया मंदिर का निर्माण कत्यूरी शासन काल में हुआ है, लेकिन जानकार लोगों का मानना है कि कत्यूरी शासन से पूर्व यहां पर एक छोटा सा मंदिर रहा है। बताते हैं कि सन् 1900 में गेवाड़ घाटी के सम्मानित लोगों ने पुराने मंदिर का जीर्णोद्घार कर उसे नया स्वरूप दिया। तब मंदिर में अष्टभुजा खड़कधारी महिशासुर मर्दनी मां भगवती माता की मूर्ति विराजमान थी, वर्ष 1970 में चोरों ने मूर्ति को चुरा लिया। इसके बाद मां काली माता की नई मूर्ति की स्थापना की गई। करीब वर्ष 1902 से यहां पर प्रतिवर्ष चैत्राष्ठमी का मेला लगता है।
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यह भी मान्यता है कि कत्यूरी राजा सोमदेव ने 1276 में इस मंदिर से कुछ ही दूर गांव धुधलिया के पास नदी किनारे विशाल पत्थर की गणेश जी की मूर्ति स्थापित की थी। जो बाद में नदी के बाढ़ से गिरकर तिरछी हो गई। जो आज भी वहीं पर स्थित है। अगनेरी मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र के दौरान चैत्राष्ठमी का विशाल मेला लगता है। नव रात्र में यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए कतार लगी रहती है। इसके अलावा पूरे वर्ष भर श्रद्घालु मां के दर्शन के लिए आते रहते हैं। साथ ही समय-समय पर कथाएं व अन्य धार्मिक आयोजन भी होते रहते हैं। दूर-दूर से पहुंचकर श्रद्घालु मां के दरबार में शीश नवाकर मन्नतें मांगते हैं। मन्नतें पूर्ण होने पर फिर मंदिर में पूजा देते हैं। यह क्रम पूरे सालभर चलता रहता है।
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PLACE : Agneri Devi,Chaukhutia,Almora,UK
Picture Credits:©Dr.S.K.Chakraborty
Information Credits: ©Dr.S.K.Chakraborty
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जब भी कभी ज़िक्र होता है पहाड़ी नारी का तो सबसे पहले ज़हन में आती है उसकी कुछ ऐसी ही छवि।हाथ में दांतुलि और चहरे पर एक खूबसूरत सी मुस्कान के साथ यह पहाड़न कितनी खूबसूरत लग रही है❤
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Picture Credits: Deep Chandra Tiwari
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थम गई हैं राहें,
थम गए हैं कदम,
देखकर ये हसीन नज़ारे,
दिल रहना चाहता है यहाँ,
हर पल,हर दम।
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Picture Credits: @rishabh_shrma19
Writeup Credits: @shreyadskoshyari .
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सभी को शारदीय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं।देवी माँ की कृपा सभी पर बनी रहे🙏
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Repost from @almora_festival_2018 - Come one , come all!!
SHOUT OUT to all you lovely people out there!! #ALMORA #FESTIVAL IN ON - This #Dussehra come visit us in Almora, #Uttarakhand to #experience a culture that is one of Kind!! Almora is known as the #cultural centre of #Kumaon and has a rich and fascinating culture. Their #music and #dance is influenced by #spirituality and religion, though #folk songs and dance depict the daily life of the people.
The people of Almora have their own folk songs which are sung on all #festive and special occasions. The town has a prominent #handicraft and copper ware industry and the shops in the markets are adorned with these beautiful #artifacts.
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About the festival - To relive the legacy of Almora’s Art, Culture, Heritage, Music and its divine Flora and Fauna. A destination filled with opportunities to not just celebrate a rich legacy but also an occasion to grow your business and investments. Almora Festival is organized by the ‘Government of Uttarakhand’ on 20-22 October.
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For details, registrations and bookings contact us on - almorafestival@gmail.com
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Jageshwar Dham is the Shiva’s abode as Jageshwar or Nagesh in the wooden highlands of Uttarakhand.It is situated at an elevation of 1,870 mt above sea level and situated at a distance of 37 KM from Almora in Kumaon Region.
It is believed to be the 8th Jyortirling among the twelve sacred Jyortiling in Hindu mythology. The Jageshwar temples are built in the Nagara style of architecture and among the 124 temples, 108 are dedicated to Lord Shiva.It is believed that Adi Shankaracharya visited Jageshwar and renovated and re-established many temples before leaving for Kedarnath. 
The oldest temples of Jageshwar Dham date from the 8th Century AD (built by Katyuri Kings) and the recent ones are believed to have been constructed in the 18th Century (Chand Rajas).
Jageshwar Dham and Vriddh Jageshwar temple are considered among the most sacred temples in the entire Kumaon region of Uttarakhand. The landscape of Jageshwar is pleasing; the temple complex is nestled in an idyllic green valley full of deodhar trees. The deodhar trees were a distinct feature of Jageshwar; in the rest of Kumaon only pine monoculture is observed. In the temple complex; there is also a huge deodhar tree which is worshipped by locals. A small stream flows behind the temple complex in Jageshwar and the locals said that it is called Jataganga river.
You can attend the evening Arti that happens around sunset time. It takes around 45 minutes.
It is said that Jageshwar used to fall on the ancient pilgrim route to Kailash Mansarovar. It also finds mentions in the travelogues of Huan Tsang.
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अभी पिछले ही दिनों की बात है एक सज्जन ने कहा था कि पहाड़ देखने में भले ही सुंदर हैं परन्तु पहाड़ों पर ज़िन्दगी बड़ी कठिन है।यह बात शत्-प्रतिशत सही है।
चार दिन को पहाड़ी वादियों की बीच रहकर भले ही महसूस होता है की हमेशा के लिए वहाँ बस जाएँ पर खूबसूरती के मुखौटे के पीछे छिपा है पहाड़ी ज़िन्दगी का असल सत्य।ऐसी ही कुछ कठिनाइयों के साथ जीवन व्यापन को मजबूर हैं धारचुला की ब्यास घाटी के निवासी।
धारचुला की ब्यास घाटी के सात गाँव के 400 परिवारों को दाने-दाने के लिए चीन का मोहताज होना पड़ रहा है।भारत सरकार द्वारा उचित मात्रा में खाद्य सामग्री न मिल पाने के कारण,वहाँ के लोगों को नमक,तेल,आटा, चावल जैसी दैनिक ज़रूरत की वस्तुओं को भी मजबूरन चीन से लेना पड़ रहा है।यह चीज़ें उन तक नेपाल के टिंकर एवं चांगरु गाँव द्वारा पहुँचाई जा रही हैं।यदि सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाली वस्तुओं की मात्रा बढ़ा दे तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।वहाँ के निवासियों का कहना है की दो पड़ोसी देशों वालेे महत्वपूर्ण बॉर्डर एरिया में रहने के बावजूद वह अपने ही देश में अनाथों की तरह रह रहे है।बूंदी,गूंजी, कुटी, नपालचू, नाभी, गर्ब्यांग,रोनकोंग ही वह सात प्रभावित गाँव हैं।
गाँववालों का कहना है कि महीनों से लिपुलेख पास,जो कि गाँव को बाकी के जनपद से जोड़ता है उसके ब्लॉक हो जाने के कारण राशन उन तक नहीं पहुँच पाया।सरकार द्वारा हर परिवार को 2किलो चावल और 5किलो आटा दिया जाता है जो कि पर्याप्त नहीं होता।
यूँ तो सरकार स्वदेशी लाओ,देश बचाओ के नारे लगाती है परंतु जब स्थितियाँ इतनी कठोर हो जाएं तो इसका कसूरवार आखिर जनता को क्यों ठहराएं?बड़े-बड़े वादे करने वाली सरकार आखिर कब जागेगी?
@narendramodi
@pmoindia
@tsrawatbjp
@bjp4india
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Information Source: India Times and Times of India
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Kausani is a hill station with stunning views and lies at an altitude of 1890m in Bageshwar district.
Kausani lies on the atop the ridge amidst dense Pine trees overlooking Someshwar valley on one side and Garur and Baijnath Katyuri valley on the other on Almora-Bageshwar-Didihat Highway.
Nested in the thick pine forests in the Kumaon Hill, Kausani offers uninterrupted views of Himalayan range with most popular peaks like Nanda Devi, Trishul and Panchchuli at the closest view point.
Mahatma Gandhi is known to have called Kausani, the ‘Switzerland of India’.Sunrises in Kausani are magical, it is an out of the world experience to see the first rays of the sun light up the snow capped peaks.Kausani is blessed with gorgeously green landscapes and silent lies in the midst of introspective valleys.
Anasakti Ashram, where Mahatma Gandhi spent about two weeks in 1929, is the only monument in the town.There is a small museum here dedicated to Mahatma Gandhi. The museum narrates Gandhi’s life stories through photographs and words.
For another enriching experience, you can also visit the Sumitra Nandan Pant Museum built in honour of the great poet, storyteller and novelist.
Kausani Tea Estate lies on the road to Baijnath and was only around 3 kms from Kausani. There are some sparse tea gardens enclosed within a gate.
16kms north of the town, located on the banks of Gomti River in Garur valley, are the leaning stone temples of Baijnath.
20 kms from Kausani is the Rudhradhari Waterfall and Caves which can be reached in half a day and involves moderate hiking of 1-2 km.
April to June are the ideal months to visit Kausani. .
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